मंगलवार, 2 जुलाई 2024

कहीं भी जीरो FIR, 30 दिन में फैसला...

कहीं भी जीरो FIR, 30 दिन में फैसला... समझें- नए कानूनों से कैसे तारीख पर तारीख से मिलेगी मुक्ति, समय पर मिल सकेगा न्यायभारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम आज यानी 1 जुलाई से प्रभावी हो गए हैं. इन कानूनों ने अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है. भारतीय दंड संहिता से लेकर भारतीय न्याय संहिता तक में बदलाव किए गए हैं. अब इलेक्ट्रानिक कम्युनिकेशन के जरिए सूचना दिए जाने पर भी FIR लिखी जा सकेगी. अगर ई-FIR दर्ज करवाई जाती है तो तीन दिन के भीकर पीड़ित को थाने जाना होगा.देश में तीनों नए आज यानी एक जुलाई से कानून लागू हो गए हैं. अब भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के तहत न्याय व्यवस्था आगे बढ़ेगी. नए कानून में डिजिटली साक्ष्य से लेकर ई-एफआईआर और फोरेंसिक लैब पर जोर दिया गया है. BNS के हर प्रावधान में समय-सीमा तय की गई है. एफआईआर से लेकर जांच, चार्जशीट और कोर्ट के फैसले तक के लिए समय-सीमा निर्धारित कर दी गई है. माना जा रहा है कि इससे ना सिर्फ पुलिस जांच में तेजी आएगी, बल्कि कोर्ट की कार्रवाई में भी तेजी आएगी और जल्द निर्णनए कानून के मुताबिक, कोर्ट को पहली सुनवाई की तारीख से 60 दिन के अंदर आरोप तय करना होगा. अंतिम सुनवाई के बाद अधिकतम 45 दिन में फैसला सुनाना जरूरी किया गया है. जांच और फैसलों में तेजी के लिए अब ईमेल, मोबाइल मैसेज भी साक्ष्य के तौर पर स्वीकार किए जाएंगे. इससे कोर्ट में तारीख पे तारीख वाली स्थिति नहीं बनेगी और केस जल्दी निपटेंगे.

न्यायिक सिस्टम में क्या बदलाव आएगा...

नए कानून में जीरो एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान शुरू किया गया है. अब किसी भी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकेगी और एफआईआर को 15 दिन के अंदर घटनास्थल वाले थाने में ट्रांसफर किया जाएगा. पहले घटनास्थल वाले थाने में ही एफआईआर दर्ज कराई जाती थी.
- कोई भी नागरिक अपराध के सिलसिले में कहीं भी जीरो FIR दर्ज करा सकेगा. जांच के लिए मामले को संबंधित थाने में भेजा जाएगा. अगर जीरो एफआईआर ऐसे अपराध से जुड़ी है, जिसमें तीन से सात साल तक सजा का प्रावधान है तो फॉरेंसिक टीम से साक्ष्यों की जांच करवानी होगी.
- फरियादी को एफआईआर और बयान से जुड़े दस्तावेज भी दिए जाने का प्रावधान किया गया है. फरियादी चाहे तो पुलिस द्वारा आरोपी से हुई पूछताछ के बिंदु भी ले सकता है. अब ई-सूचना से भी एफआईआर दर्ज हो सकेगी. हत्या, लूट या रेप जैसी गंभीर धाराओं में भी ई-एफआईआर हो सकेगी. वॉइस रिकॉर्डिंग से भी पुलिस को सूचना दे सकेंगे. E-FIR के मामले में फरियादी को तीन दिन के भीतर थाने पहुंचकर एफआईआर की कॉपी पर साइन करना जरूरी होंगे. 
- नए कानून में अभियुक्त को मौका मिलेगा कि वो मजिस्ट्रेट कोर्ट में चालान पेशी के 60 दिन के भीतर यह आवेदन कर सकता है कि केस चलने योग्य है या नहीं. पहले कोर्ट अपने विवेक का इस्तेमाल कर खुद तय करता था कि केस विचार करने योग्य है या नहीं.
- FIR के 90 दिन के भीतर चार्जशीट चार्जशीट दाखिल करनी जरूरी होगी. कोर्ट में आरोप की पहली सुनवाई की तारीख से 60 दिन के अंदर आरोप तय करना अनिवार्य किया गया है. इसी तरह गवाह के संबंध में प्रावधान किया गया है कि वो वीडियो और ऑडियो के जरिए साक्ष्य प्रस्तुत कर सकता है. लोकसेवक के लिए ऑडियो-वीडियो साक्ष्य अनिवार्य किया गया है.
- कोर्ट में जिस दिन सुनवाई समाप्त हो जाएगी, उस तारीख से 30 दिन के अंदर कोर्ट को जजमेंट यानी फैसला देना होगा. विशेष कारण से 15 दिन तक निर्णय टाला जा सकता है. यानी कोर्ट को 45 दिन में अपना निर्णय सुनाना अनिवार्य किया गया है. जजमेंट दिए जाने के बाद 7 दिनों के भीतर उसकी कॉपी मुहैया करानी होगी. 
- पुलिस को हिरासत में लिए गए शख्स के बारे में उसके परिवार को लिखित में बताना होगा. ऑफलाइन और ऑनलाइन भी सूचना देनी होगी.
- BNSS की धारा 86 में में अपराध से अर्जित संपत्ति के बारे में बताया गया है. यदि संपत्ति अपराध से अर्जित है तो उसे जब्त कर लिया जाएगा. फरार आरोपी की अनुपस्थिति में धारा 356 के तहत सुनवाई और सजा के निर्णय का प्रावधान किया गया है.पुलिस से लेकर कोर्ट तक... कितनी बदलेगी डिजिटली प्रोसेस

7 साल सजा से जुड़े केस में अब फॉरेंसिक जांच अनिवार्य कर दी गई है. BNSS की धारा 176 में विवेचना की पूरी प्रक्रिया का पहली बार जिक्र किया गया है. FSL की टीम को मौके पर बुलाना और वीडियोग्राफी करना अनिवार्य किया गया है. ये किसी केस को सुलझाने में पुलिस की मदद कर सकता है. घर की तलाशी में भी वीडियोग्राफी अनिवार्य है. इसके अलावा, पुलिस ईमेल के जरिए समन भेज सकती है. या इसे वॉट्सऐप पर भी भेजा जा सकता है. आरोपी का पता, ईमेल एड्रेस और मोबाइल नंबर अदालतों के पास भी सेव रहेगा. 

इतना ही नहीं, एफआईआर से लेकर जांच और कोर्ट में बयान तक सारी प्रक्रिया में डिजिटल माध्यम का जोर रहेगा. ई-रिकॉर्ड, जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर और चार्जशीट भी डिजिटली होगी. रेप पीड़िता के ई-बयान भी दर्ज होंगे. गवाह, अभियुक्त और पीड़ित कोर्ट में वर्चुअली पेश हो सकेंगे. सीआरपीसी की धारा 144 (A) में प्रावधान था कि किसी भी धार्मिक या सामाजिक जुलूसों में हथियार लेकर निकलने पर कलेक्टर से अनुमति लेना जरूरी था, लेकिन नए कानून में इसे हटा दिया गया है. 
रिमांड पर लेने की अवधि भी बढ़ी

पुलिस अब 10 साल या इससे ज्यादा सजा वाले अपराध में आरोपी को पहले 60 दिन तक रिमांड पर ले सकेगी. अब तक प्रथम 15 दिन तक रिमांड लेने का प्रावधान था. 10 साल से कम सजा के मामलों में 40 दिन पुलिस रिमांड ले सकती है. पहले यह 15 दिन ही थी.

मंगलवार, 10 अक्तूबर 2023

एक से ज्यादा लोगों के बीच कैसे बांटी जाती है प्रॉपर्टी

    एक से ज्यादा लोगों के बीच  कैसे बांटी जाती है प्रॉपर्टी,
  यहां जानिए हर छोटी-बड़ी बात

               
                     @1
 
                        @3

             @5

                   अगर कोई शख्स किसी अन्य के साथ संयुक्त रूप से प्रॉपर्टी का मालिक है तो इसका मतलब यह नहीं कि संपत्ति में उसका आधा हिस्सा है। यह प्रॉपर्टी में निवेश पर निर्भर करता है, जिसकी जानकारी बैनामे में होती है। लेकिन एेसी जानकारी न होने पर कानून यह मानकर चलता है कि सभी मालिकों का हिस्सा बराबर है और टाइटल भी गैर-विभाजित है। 

               @6
@8

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3}

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6}हिंदू उत्तराध‌िकार अध‌िनियम से पहले और बाद में हिंदू का वसीयत करने का अध‌िकार

7}निःशुल्क कानूनी सहायता-

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बुधवार, 28 जून 2023

हिन्दू विवाह अधिनियम - धारा 9, दाम्पत्य अधिकारों का प्रत्यास्थापन.....

 हिन्दू विवाह अधिनियम -  धारा 9, दाम्पत्य अधिकारों का प्रत्यास्थापन...@1

विवरण

जबकि पति या पत्नी में से किसी ने युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना दूसरे से अपना साहचर्य प्रत्याहत कर लिया है, तब परिवेदित पक्षकार दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन के लिये याचिका द्वारा आवेदन जिला न्यायालय में कर सकेगा और न्यायालय ऐसी याचिका में किये गये कथनों की सत्यता के बारे में और बात के बारे में आवेदन मंजूर करने का कोई वैध आधार नहीं है; अपना समाधान हो जाने पर तदनुसार दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन के लिए आज्ञप्ति देगा।

@2 स्पष्टीकरण - 

जहाँ प्रश्न यह उठता है कि क्या साहचर्य से प्रत्याहरण के लिए युक्तियुक्त प्रतिहेतु है, वहाँ युक्तियुक्त प्रतिहेतु साबित करने का भार उस व्यक्ति पर होगा जिसने साहचर्य से प्रत्याहरण किया है।

@3

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बुधवार, 18 जनवरी 2023

चेक बाउंस होने पर क्या करें? अधिनियम (एन आइ एक्ट) की धारा 138

 अधिनियम (एन आइ एक्ट) की धारा 138
        
 चेक बाउंस होने पर क्या करें?
               
 चेक बाउंस / चेक की अस्वीकृति
  @1              
          एक चेक अस्वीकृत या बाउंस तब होता है, जब वह किसी बैंक को भुगतान के लिए प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन किसी कारण या दूसरे अन्य कारणवश उसके प्रति अपेक्षित भुगतान के बिना    वापस कर दिया जाता    है।चेक बाउंस उस व्यक्ति (आहर्ता) जिसने चेक जारी किया है के बैंक खाते में अपर्याप्त धन या चेक पर उस के हस्ताक्षर का बैंक खाते में मूल हस्ताक्षर से मेल नहीं खाने के     कारण    हो    सकता    है।

@2                     आप उस व्यक्ति इस तरह का चेक जारी किया है के खिलाफ कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत कार्यवाही कर सकते है। पर विचार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण और उपयोगी प्रावधान परक्राम्य लिखत अधिनियम (एन आइ एक्ट) की धारा 138 है।चेक बाउंस मामले में लिया जाने वाला पहला कदम उस व्यक्ति जिसने चेक जारी किया है और जिसे आहर्ता कहा जाता है को एक मांग पत्र या कानूनी नोटिस भेजना है। मांग पत्र या तो पीड़ित व्यक्ति खुद तैयार कर सकता है या एक वकील से मदद भी                                                                                                        ले सकता है

@3

महत्वपूर्ण बातें जिन्हे ध्यान में रखना चाहिए

                        एक मांग पत्र, बैंक, जिसमें चेक प्रस्तुत किया गया है द्वारा चेक वापस लौटाए जाने की तिथि से 30 दिनों की अवधि के भीतर भेज दिया जाना चाहिए। हालांकि, अगर आहर्ता कानूनी नोटिस भेजे जाने की तारीख से 15 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर राशि का भुगतान नहीं करता है, तो पीड़ित व्यक्ति इस स्थिति में आहर्ता के खिलाफ चेक बाउंस का मामला भी दर्ज कर सकता है।

@4

अपेक्षित दस्तावेज़:

चेक बाउंस केस दर्ज करने से पहले निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
1) मूल चेक और वापसी का ज्ञापन।
2) नोटिस की प्रतिलिपि और मूल डाक प्राप्तियां।
3) साक्ष्य हलफनामा।

@5

चेक बाउंस केस कहाँ दायर किया जा सकता है?

                  चेक बाउंस केस के अधिकार क्षेत्र के  बारे में काफी बहस हुई। लेकिन हालिया सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों ने इस मुद्दे को स्पष्ट किया है। चेक बाउंस केस उस क्षेत्र में दर्ज किया जाना चाहिए, जहां आपके द्वारा चेक भुगतान के लिए जमा किया गया था।

@6

चेक बाउंस केस कौन दायर कर सकता है? 


                   आमतौर पर, चेक का भुगतानकर्ता, चेक बाउंस केस दायर करता है। लेकिन विशेष मामलों में, मामले को वकालतनामे के माध्यम से भी दायर किया जा सकता है। ध्यान रखने योग्य एक महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायतकर्ता को मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ ग्रहण के तहत जांच के लिए उपस्थित होना अनिवार्य है।

  @7                 चेक बाउंस मामलों में दोषी पाए जाने पर  2 साल तक की सजा हो सकती है। इस कानून के तहत अगर निचली अदालत में फैसला आरोपी के खिलाफ आता है / वह ऊपर के अदालत में अपील कर सकता है/ 

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#9

5}क्या दूसरी पत्नी को पति की संपत्ति में अधिकार है?

6}हिंदू उत्तराध‌िकार अध‌िनियम से पहले और बाद में हिंदू का वसीयत करने का अध‌िकार

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#10

गुरुवार, 29 सितंबर 2022

भारत रत्न विजेता /देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न

  देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न की शुरुआत 1954 से हुई। अब तक विभिन्न क्षेत्रों की 42 हस्तियों को भारत रत्न के सम्मान से नवाजा जा चुका है। 

पहला भारत रत्न का सम्मान देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ- सर्वपल्ली राधाकृष्णन को  1954 में प्रदान किया 


(1) 1954 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन-              (देश के दूसरे राष्ट्रपति), 

(2) 1954 में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी-             (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, अंतिम गवर्नर  जनरल).

(3) 1954 में डॉ. चन्द्रशेखर वेंकट रमन-      (नोबेल पुरस्कार विजेता, भौतिकशास्त्री) 

(4) 1955 में डॉ. भगवान दास -                               (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लेखक) 
(5) 1955 में सर डॉ. मौक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या-    (सिविल इंजीनियर, मैसूर के दीवान), 
(6) 1955 में पं. जवाहरलाल नेहरू -                        (प्रथम प्रधानमंत्री, लेखक, स्वतंत्रता सेनानी)(7) 1957 में गोविंद वल्लभ पंत-                                            (स्वतंत्रता सेनानी, उप्र के पहले मुख्यमंत्री, देश के दूसरे गृहमंत्री) 
(8) 1957 में डॉ. धोंडो केशव कर्वे -                                                (शिक्षक और समाज सुधारक) 
(9)1958 में डॉ. बिधान चन्द्र राय -                                  (चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री) 
(10) 1961 में पुरुषोत्तम दास टंडन -                                             (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और शिक्षक)
(11) 1961 में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद-                                               (प्रथम राष्ट्रपति, स्वतंत्रता सेनानी, विधिवेत्ता) 
(12) 1963 में डॉ. जाकिर हुसैन                                        (देश के तृतीय राष्ट्रपति) 
(13) 1963 में डॉ. पांडुरंग वामन काणे                                 (भारतविद और संस्कृत के विद्वान) 
(14) 1966 में लाल बहादुर शास्त्री                                   (देश के तीसरे प्रधानमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी) 
(15) 1971 में इंदिरा गांधी                                                    (देश की चौथी प्रधानमंत्री)
(16) 1975 में वराहगिरी वेंकट गिरी                                    (देश के चौथे राष्ट्रपति, श्रमिक संघवादी),  
   
(17) 1976 में के. कामराज                                              (स्वतंत्रता सेनानी, मुख्यमंत्री मद्रास),  
(18) 1980 में मदर टेरेसा                                              (नोबेल पुरस्कार विजेता, कैथोलिक नन, मिशनरीज़ संस्थापक) 
(19) 1983 में आचार्य विनोबा भावे                                   (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक), 
(20) 1987 में खान अब्दुल गफ्फार खान      
       (स्वतंत्रता सेनानी, प्रथम अभारतीय) 
(21) 1988 में मरुदुर गोपाला रामचन्दम            (अभिनेता, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री), 
(22) 1990 में डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर         (भारतीय संविधान के वास्तुकार, राज‍नीतिज्ञ,     अर्थशास्त्री) 
(23) 1990 में नेल्सन मंडला                                    (नोबेल पुरस्कार विजेता, रंगभेद विरोधी आंदोलन के नेता) 
(24) 1991 में राजीव गांधी (देश के सातवें प्रधानमंत्री) 
(25) 1991 में सरदार वल्लभ भाई पटेल (देश के पहले गृहमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी), 
(26) 1991 में मोरारजी भाई देसाई (देश के पांचवें प्रधानमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी) 
(27) 1992 में मौलाना अबुल कलाम आजाद (देश के प्रथम शिक्षा मंत्री, स्वतंत्रता सेनानी) 
(28) 1992 में जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (जेआरडी टाटा), (देश के जाने माने उद्योगपति) 
(29) 1992 में सत्यजीत रे (फिल्म निर्माता, निर्देशक) 
(30) 1997 में एपीजे अब्दुल कलाम (देश के 11वें राष्ट्रपति, वैज्ञानिक)
(31) 1997 में गुलजारीलाल नंदा (दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी) 
(32) 1997 में अरुणा आसिफ अली (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी), 
(33) 1998 में एमएस सुब्बालक्ष्मी (शास्त्रीय संगीत गायिका) 
(34) 1998 में सी. सुब्रमण्यम (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कृषि मंत्री), 
(35) 1998 में जयप्रकाश नारायण (स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ), 
(36) 1999 में पंडित रविशंकर (सितार वादक) 
(37) 1999 में अमर्त्य सेन (नोबेल पुरस्कार विजेता, अर्थशास्त्री), 
(38) 1999 में गोपीनाथ बोरदोलोई (स्वतंत्रता सेनानी, असम के मुख्यमंत्री), 
(39) 2001 में लता मंगेशकर (पार्श्व गायिका),  
(40) 2001 में उस्ताद बिस्मिल्ला खां (शहनाई वादक) 
(41) 2008 में पंडित भीमसेन जोशी                       (शास्त्रीय गायक), 
(42) 2014 में सचिन तेंडुलकर                         (भारतीय क्रिकेटर),
(43) सीएनआर राव                                       (जाने-माने वैज्ञानिक व केमेस्ट्री के विशेषज्ञ ), 
(44) 2015 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी                             ( जाने-माने राजनेता),

(45) 2015 में पं. मदनमोहन मालवीय                                                ( शिक्षाविद, समाज सुधारक),  
 2019      -     
प्रणब मुखर्जी – प्रणब मुखर्जी देश के 13 वें राष्ट्रपति रहे हैं।
नानाजी देशमुख – महाराष्ट्र के नानाजी देशमुख मुख्य रूप से समाजसेवी रहे।
भूपेन हज़ारिका – भूपेन हज़ारिका गायक एवं संगीतकार होने के साथ ही एक कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति तथा संगीत के अच्छे जानकार थे। 

शुक्रवार, 1 जुलाई 2022

पत्नी का कानूनी अधिकार क्या है

     पत्नी का कानूनी  अधिकार क्या है
               
 1. स्त्रीधन का अधिकार - एक पत्नी के पास उसके सभी स्त्रीधन के स्वामित्व अधिकार हैं, उदाहरण के लिए शादी से पहले और उसके बाद दिए गए उपहार और धन। स्त्रीधन के स्वामित्व के अधिकार पत्नी के हैं, भले ही इसे अपने पति या उसके ससुराल वालों की हिरासत में रखा गया हो।
@1
2. निवास का अधिकार - एक पत्नी को वैवाहिक घर में रहने का अधिकार है जहां उसका पति रहता है, भले ही यह एक पूर्वज घर, एक संयुक्त परिवार का घर, एक आत्मनिर्भर घर या एक किराए पर घर हो।

@2

3. रिश्ते का अधिकार - एक हिंदू पति का अवैध संबंध नहीं हो सकता है। वह एक और लड़की से शादी नहीं कर सकता है जब तक कि वह कानूनी रूप से तलाकशुदा न हो। एक पति से व्यभिचार का आरोप लगाया जा सकता है अगर वह किसी और विवाहित महिला के साथ रिश्ते में है। उनकी पत्नी को अपने अतिरिक्त वैवाहिक संबंधों के आधार पर तलाक के लिए फाइल करने का अधिकार भी है।
@3

4. गरिमा और आत्म सम्मान के साथ जीने का अधिकार - पत्नी को अपने जीवन को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है और उसके पति और ससुराल वालों के समान जीवनशैली है। उसे मानसिक और शारीरिक यातना से मुक्त होने का अधिकार भी है।

@4

5. पति द्वारा रखरखाव का अधिकार - एक पत्नी अपने जीवन स्तर के अनुसार अपने पति द्वारा सभ्य जीवन स्तर और जीवन के बुनियादी आराम का दावा करने की हकदार है।
@5

6. बाल रखरखाव का अधिकार - पति और पत्नी को अपने नाबालिग बच्चे के लिए अवश्य प्रदान करना चाहिए। अगर पत्नी कमाई करने में असमर्थ है, तो पति को वित्तीय सहायता प्रदान करनी चाहिए। यदि दोनों माता-पिता आर्थिक रूप से असमर्थ हैं, तो वे दादा दादी से बच्चे की देखभाल करने में सहायता ले सकते हैं। एक नाबालिग बच्चे को भी पितृ संपत्ति में विभाजन की तलाश करने का अधिकार है।

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सोमवार, 20 जून 2022

प्रायद्वीपीय पर्वत:

 प्रायद्वीपीय पर्वत:

1. विन्ध्याचल पर्वत

यह पर्वतमाला में गुजरात से लेकर पूर्व उत्तर-प्रदेश तक जाती है। विन्ध्याचल पर्वत ही उत्तर व दक्षिण भारत को स्पष्ट रूप से अलग करता है। इसकी औसत ऊंचाई 200 मीटर है।

@1

2. सतपुड़ा पर्वत
सतपुड़ा पश्चिम में राजपीपला से आरम्भ होकर छोटा नागपुर के पठार तक विस्त्र्त है।
महादेव और मैकाल पहाड़ियाँ भी इस पर्वतमाला का हिस्सा है। 1350 मी ऊंचा धूपगढ़ चोटी इसकी सबसे ऊंची चोटी है।

@2

3. पूर्वी घाट
इसकी औसत ऊंचाई 615 मीटर है ओर यह श्रेणी 1300 किलोमीटर लम्बी है। इस शष्ंखला की सबसे ऊंची चोटी महेंद्रगिरि (1501 मीटर) है। पूर्वी घाट के अंतर्गत दक्षिण से उत्तर की ओर पहाड़ियों को पालकोंडा, अन्नामलाई, नावादा और षिवराय की पहाड़ियों के नाम से जाना जाता है।

@3

4. पश्चिमी घाट या सह्याद्रि
इसकी औसत ऊंचाई 1200 मीटर है और यह पर्वतमाला 1600 किमी लम्बी है। इस श्रेणी में दो प्रमुख दर्रे हैं - थालघाट जो नासिक को मुम्बई से जोड़ता है और भोरघाट। तीसरा दर्रा पालघाट इस श्रेणी के दक्षिणी हिस्से को मुख्य श्रेणी से अलग करता है।

@4

5. अरावली पर्वत
यह राजस्थान से लेकर दिल्ली के दक्षिण पश्चिम तक विस्त्रत है। इसकी कुल लम्बाई लगभग 880 किमी है। ये विश्व के सबसे पुराने पर्वत हैं। गुरु शिखर (1722 मीटर) इनकी सबसे ऊंची चोटी है। इस पर प्रसिद्ध पर्यटन स्थल माउण्ट आबू स्थित है।
प्रायद्वीप पर्वतों की सबसे ऊंची चोटी अन्नाईमुड़ी, अन्नामलाई पहाड़ियों में स्थित है। सुदूर-दक्षिण में काडोमम की पहाड़ियाँ हैं।

6. नीलगिरि या नीले पर्वत
नीलगिरि की पहाड़ियाँ, पश्चिम घाट व पूर्वी घाट की मिलन स्थली है।
नीलगिरि की सबसे ऊंची चोटी दोद्दाबेटटा है।@5

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