शनिवार, 28 मार्च 2020

महामारी अधिनियम क्या है (महामारी एक्ट)1987)

(Epidemic Disease Act, 1987)

#1

महामारी अधिनियम क्या है 

(महामारी एक्ट)

क्या है महामारी एक्ट, जिसे Corona से लड़ने के लिए इस्तेमाल कर रही है भारत सरकार // भारत में कोरोनावायरस से लड़ने के लिए सरकार महामारी एक्ट की मदद ले रही है। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इसके लिए निर्देश दे दिया गया है।, 

#2

क्या है ये एक्ट और क्या हैं इसके प्रावधान, कोरोना से लड़ने में किस तरह मदद कर सकता है ये कानून  

क्या होता है महामारी एक्ट, जानें कब लगाती है सरकार?

देश में महामारी एक्ट लागू है. महामारी एक्ट में जो नियमों और आदेशों का उल्लंघन करेगा, वो अब अपराध है. महामारी एक्ट कोई राज्य सरकार तब लागू कर सकती है, जब उसे लगे कि महामारी की रोकथाम के लिए ये जरूरी है.

#3

कब लागू कर सकती है सरकार?

 महामारी अधिनियम 1897 के लागू होने के बाद सरकारी आदेश को ना मानना अपराध है. आईपीएसी की धारा 188 के तहत इसमें सजा का प्रावधान है. ये एक्ट अधिकारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है.

          इसके अलावा भारत सरकार ने देशभर में महामारी एक्ट (Epidemic Act) की मदद लेने का भी निर्देश जारी किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, । इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को महामारी बीमारी कानून (Epidemic Disease Act, 1987) के सेक्शन 2 के प्रावधानों की मदद लेने के लिए कहा है। इस कानून के तहत उत्तर प्रदेश के आगरा में एक केस दर्ज भी किया जा चुका है।

#4          क्या है ये महामारी कानून, इसे कब, किसने और क्यों बनाया, इसके प्रावधान क्या हैं, महामारी कानून के सेक्शन 2 में क्या कहा गया है, इस कानून की खास बातें क्या हैं.. इन सभी सवालों के जवाब आपको आगे बताए जा रहे हैं।

क्या है महामारी कानून?

ये कानून आज से 123 साल पहले साल 1897 में बनाया गया था, जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था। तब बॉम्बे में ब्यूबॉनिक प्लेग नामक महामारी फैली थी। जिस पर काबू पाने के उद्देश्य से अंग्रेजों ने ये कानून बनाया। महामारी वाली खतरनाक बीमारियों को फैलने से रोकने और इसकी बेहतर रोकथाम के लिए ये कानून बनाया गया था। इसके तहत तत्कालीन गवर्नर जेनरल ने स्थानीय अधिकारियों को कुछ विशेष अधिकार दिए थे।

#5

महामारी कानून की खास बातें

         ये कानून भारत के सबसे छोटे कानूनों में से एक है। इसमें सिर्फ चार सेक्शन बनाए गए हैं।

        पहले सेक्शन में कानून के शीर्षक और अन्य पहलुओं व शब्दावली को समझाया गया है। दूसरे सेक्शन में सभी विशेष अधिकारों का जिक्र किया गया है जो महामारी के समय में केंद्र व राज्य सरकारों को मिल जाते हैं।

         तीसरा सेक्शन कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता (IPC - Indian Penal Code) की धारा 188 के तहत मिलने वाले दंड/जुर्माने का जिक्र करता है। चौथा और आखिरी सेक्शन कानून के प्रावधानों का क्रियान्वयन करने वाले अधिकारियों को कानूनी संरक्षण देता है।

#6

क्या कहता है Epidemic Act Section 2

     इसमें महामारी के दौरान सरकार को मिलने वाले विशेषाधिकारों का जिक्र किया गया है। इसके अनुसार, सरकार जरूरत महसूस होने पर अधिकारियों को सामान्य प्रावधानों से अलग अन्य जरूरी कदम उठाने के लिए कह सकती है।

          सरकार के पास रेलवे या अन्य साधनों से यात्रा कर रहे लोगों की जांच करने/करवाने का अधिकार है। जांच कर रहे अधिकारी को अगर किसी व्यक्ति के संक्रमित होने का शक भी होता है, तो वह उसे भीड़ से अलग किसी अस्पताल या अन्य व्यवस्था में रख सकता है।

  #7        महामारी कानून के सेक्शन 3 के तहत इसका जिक्र किया गया है। इसके अनुसार, कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने / न मानने पर दोषी को 6 महीने तक की कैद या 1000 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।

         सरकार किसी बंदरगाह से आ रहे जहाज या अन्य चीजों की पूरी जांच कर सकती है, उसे डिटेन भी कर सकती है।

उल्लंघन पर क्या लगेगा जुर्माना.

  #8

THE EPIDEMIC DISEASES ACT, 

1897________

_ARRANGEMENT OF SECTIONS

_________

SECTIONS

1. Short title and extent.
2. Power to take special measures and prescribe regulations as to dangerous epidemic disease.
2A. Powers of Central Government.
3. Penalty.
4. Protection to persons acting under Act.

#9

THE EPIDEMIC DISEASES ACT, 1897ACT NO. 3 OF 18971[4th February, 1897.]

An Act to provide for the better prevention of the spread of Dangerous Epidemic Diseases.
WHEREAS it is expedient to provide for the better prevention of the spread of dangerous epidemic 
disease; It is hereby enacted as follows :—
1. Short title and extent.—(1) This Act may be called the Epidemic Diseases Act, 1897.

[(2) It extends to the whole of India except 3 
[the territories which, immediately before the 1st 
November, 1956, were comprised in Part B States]] 4
* * *
5
* * * * *
6
#2. Power to take special measures and prescribe regulations as to dangerous epidemic 
disease.

—(1) When at any time the 
[State Government] is satisfied that  
[the State] or any part 
thereof is visited by, or threatened with, an outbreak of any dangerous epidemic disease, the 8 
[State 
Government], if 9 
[it] thinks that the ordinary provisions of the law for the time being in force are 
insufficient for the purpose, may take, or require or empower any person to take, such me asures 
and, by public notice, prescribe such temporary regulations to be observed by the public or by any 
person or class of persons as 
[it] shall deem necessary to prevent the outbreak of such disease or 
the spread thereof, and may determine in what manner and by whom any expenses incurred 
(including compensation if any) shall be defrayed.
(2) In particular and without prejudice to the generality of the foregoing provisions, the  

[State 
Government] may take measures and prescribe regulations for—
10* * * * *
(b) the inspection of persons travelling by railway or otherwise, and the segregation, in hospital,
temporary accommodation or otherwise, of persons suspected by the inspecting officer of being infected 
with any such disease.
11* 1
#[2A. Powers of Central Government.—When the Central Government is satisfied that India 
or any part thereof is visited by, or threatened with, an outbreak of any dangerous epidemic 
disease and that the ordinary provisions of the law for the time being in force are insufficient to 
prevent the outbreak of such disease or the spread thereof, the Central Government may take measures and prescribe regulations for the inspection of any ship or vessel leaving or arriving at any port in 2 [the territories to which this Act extends] and for such detention thereof, or of any person intending to sail therein, or arriving thereby, as may be necessary.]

#3. Penalty.—Any person disobeying any regulation or order made under this Act shall be deemed to have committed an offence punishable under section 188 of the Indian Penal Code (45 of 1860).
#4. Protection to persons acting under Act.—No suit or other legal proceeding shall lie against any person for anything done or in good faith intended to be done under this Act.

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#

बुधवार, 25 मार्च 2020

लॉक डाउन //कर्फ्यू किसे कहते हैं?


Lockdown Meaning in Hindi: 

 लॉक डाउन का क्या मतलब है?

#1
लॉकडाउन और कर्फ्यू में कैसे अलग होते हैं हालात?
लेकिन ये लॉकडाउन होता क्या है और कर्फ्यू से किस तरह अलग है? कई लोग लॉकडाउन और कर्फ्यू को एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इन दोनों में कुछ अंतर हैं.

#2

कर्फ्यू किसे कहते हैं?

कर्फ्यू का मतलब होता है लोगों को एक विशेष समय सीमा के लिए घर में रहने का आदेश देना. प्रशासन आपातकालीन स्थितियों में कर्फ्यू लगाता है. इसके जरिए लोगों को हिदायत दी जाती है कि वो सड़कों पर न निकलें. ऐसा एक प्रशासनिक आदेश के तहत किया जाता है.

कर्फ्यू के दौरान स्कूल, कॉलेज, बाजार जैसी जगहें बंद रहती हैं. कर्फ्यू का उल्लंघन करने पर जुर्माना या गिरफ्तारी हो सकती है.

#3

लॉकडाउन का क्या मतलब होता है?

लॉकडाउन एक इमरजेंसी प्रोटोकॉल है. मतलब कि अलग-थलग करने के लिए, अथॉरिटी जब लोगों को किसी एक जगह सीमित करना चाहती है, तो उसे लॉकडाउन का नाम दिया जाता है. ऐसे समय में लोगों को किसी इलाके या इमारत में रहने के निर्देश दिए जाते हैं और वहां से न निकलने को कहा जाता है.

हालांकि, लॉकडाउन के दौरान जरूरी सेवाएं चालू रहती हैं. ये सब प्रशासन पर निर्भर करता है कि वो किन सेवाओं को चालू रखता है. लेकिन व्यापक रूप से देखा जाए तो बैंक, बाजार, सब्जी की दुकानें, डेरी वगैरह खुले रहते हैं.  

#4

कर्फ्यू और लॉकडाउन में अंतर

कर्फ्यू और लॉकडाउन के बीच प्रशासन की ओर से दी जाने वाली छूट का फर्क होता है. किसी इलाके में अगर दंगे या हिंसा होती है और प्रशासन स्थिति पर काबू पाने के लिए कर्फ्यू लगाता है, तो उतने समय के लिए जरूरी सेवाएं जैसे बाजार और बैंक भी बंद रहते हैं. जब कर्फ्यू में ढील दी जाती है, तभी ये सारी सेवाएं भी लोगों को मुहैया कराई जाती हैं.
लॉकडाउन में जरूरी सेवाएं बंद नहीं की जाती हैं. जैसा कि इस समय देश में कई राज्यों में लॉकडाउन हो रखा है, लेकिन सभी जगह बैंक, डेरी, जरूरी सामान के लिए दुकानें खुली हुई हैं.

#5
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जानिए क्या होती है सीआरपीसी की धारा-144



क्या है धारा-144 crpc

#1

             सीआरपीसी के तहत आने वाली धारा-144 शांति व्यवस्था कायम करने के लिए लगाई जाती है. इस धारा को लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट यानी जिलाधिकारी एक नोटिफिकेशन जारी करते है. और जिस जगह भी यह धारा लगाई जाती हैवहां चार या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं हो सकते हैं. इस धारा को लागू किए जाने के बाद उस स्थान पर हथियारों के लाने ले जाने पर भी रोक लगा दी जाती है.

#2

क्या है सजा का प्रावधान

क्या है दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी)

                दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973) भारत में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून है. यह सन् 1973 में पारित हुआ था. इसे देश में अप्रैल 1974 को लागू किया गया. दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त नाम 'सीआरपीसीहै. जब कोई अपराध किया जाता हैतो सदैव दो प्रक्रियाएं होती हैंजिन्हें पुलिस अपराध की जांच करने में अपनाती है. एक प्रक्रिया पीड़ित के संबंध में और दूसरी आरोपी के संबंध में होती है. सीआरपीसी में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है. खराब व्यवहार की इजाजत नहीं देता कानून

कुछ प्रकार के मानव व्यवहार ऐसे होते हैं जिसकी कानून इजाजत नहीं देता. ऐसे व्यवहार करने पर किसी व्यक्ति को उसके नतीजे भुगतने पड़ते हैं. खराब व्यवहार को अपराध या गुनाह कहते हैं. और इसके नतीजों को दंड यानी सजा कहा जाता है.

#3

जानिए क्या होती है सीआरपीसी की धारा-144


 पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा-144 लगा दी है. कहीं भी किसी भी शहर में हालात बिगड़ने की संभावना या किसी घटना के बाद धारा-144 लगा दी जाती है. आईए जानते हैं कि आखिर धारा-144 है क्या और इसका पालन न करने पर क्या सजा हो सकती है.


अक्सर हम सभी सुनते या पढ़ते हैं कि पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा-144 लगा दी है. कहीं भी किसी भी शहर में हालात बिगड़ने की संभावना या किसी घटना के बाद धारा-144 लगा दी जाती है.

#4

 आईए जानते हैं कि आखिर धारा-144 है क्या और इसका पालन न करने पर क्या सजा हो सकती है.

              धारा-144 का उल्लंघन करने वाले या इस धारा का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार कर सकती है. उस व्यक्ति की गिरफ्तारी धारा-107 या फिर धारा-151 के तहत की जा सकती है. इस धारा का उल्लंघन करने वाले या पालन नहीं करने के आरोपी को एक साल कैद की सजा भी हो सकती है. वैसे यह एक जमानती अपराध है, इसमें जमानत हो जाती है.


#5

Section 144 in The Code Of Criminal Procedure, 1973

144. Power to issue order in urgent cases of nuisance of 

apprehended danger.

#6

1) In cases where, in the opinion of a District Magistrate, a Sub- divisional Magistrate or any other Executive Magistrate specially empowered by the State Government in this behalf, there is sufficient ground for proceeding under this section and immediate prevention or speedy remedy is desirable, such Magistrate may, by a written order stating the material facts of the case and served in the manner provided by section 134, direct any person to abstain from a certain act or to take certain order with respect to certain property in his possession or under his management, if such Magistrate considers that such direction is likely to prevent, or tends to prevent, obstruction, annoyance or injury to any person lawfully employed, or danger to human life, health or safety, or a disturbance of the public tranquility, or a riot, of an affray.

2) An order under this section may, in cases of emergency or in cases where the circumstances do not admit of the serving in due time of a notice upon the person against whom the order is directed, be passed ex parte.

#7

3)An order under this section may be directed to a particular individual, or to persons residing in a particular place or area, or to the public generally when frequenting or visiting a particular place or area.

4) No order under this section shall remain in force for more than two months from the making thereof: Provided that, if the State Government considers it necessary so to do for preventing danger to human life, health or safety or for preventing a riot or any affray, it may, by notification, direct that an order made by a Magistrate under this section shall remain in force for such further period not exceeding six months from the date on which the order made by the Magistrate would have, but for such order, expired, as it may specify in the said notification.

#8

5)Any Magistrate may, either on his own motion or on the application of any person aggrieved, rescind or alter any order made under this section, by himself or any Magistrate subordinate to him or by his predecessor- in- office.

6)The State Government may, either on its own motion or on the application of any person aggrieved, rescind or alter any order made by it under the proviso to sub- section (4).

7)Where an application under sub- section (5) or sub- section (6) is received, the Magistrate, or the State Government, as the case may be, shall afford to the applicant an early opportunity of appearing before him or it, either in person or by pleader and showing cause against the order; and if the Magistrate or the State Government, as the case may be, rejects the application wholly or in part, he or it shall record in writing the reasons for so doing. D.- Disputes as to immovable property.

#9                                      Thank you

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